Sunday, September 18, 2011

वक़्त गुजरता सा गया

वक़्त यु ही लम्हों में गुजरता सा गया
पल के साथ ये पल भी बदलता सा गया
यु ही बीत गए जाने कैसे सारे लम्हे
जिंदगी रुक गई, वक़्त बढता सा गया

काश शब्द दिल में कई बार आता है
काश ये कर लेते या वो कर लेते
दिल में कसक भी कई बार उठती है
काश न कहते अगर उस पल में जी लेते

यु ही गुजर जाने देते है हम वक़्त को
फिर सिर्फ हाथ में अफ़सोस होता है
वक़्त में न लौट पाने की कसक होती है
दिल कुछ न बदल पाने पर रोता है

आज जो पल हाथ में है उसे जी लो पूरा
कि कल उस पल को खोने का गम न हो
ख़ुशी पा लो जिंदगी से इसी पल में
कि दिल में कुछ न करने कि कसक न हो