Wednesday, October 1, 2008

तन्हाई

उसकी यादो से हुए करीब इतना
कि सारी दुनिया से दूर हम जाने लगे
अकेले क्यू होने लगे हम इतना
कि आंसू तनहइयो में रुलाने लगे

चुप सा हम भीड़ का कोना क्यू है
क्यू आज किसी आह्ट का इंतजार नही
क्यू सांसो में अकेलापन है ,
इस पल में क्यू किसी का साथ नही

उसने तो चुन ली रह दूर जाने के लिए
दिल ने चाह मैं उसी राह पर चली जाऊ
पर उसकी हम सफर बन सकू गी मैं
दिल को ये बात कैसे समझाऊ

शायद वक्त के साथ अकेलेपन से दोस्ती हो जाए
हम फिर से मुस्कराना सीख ले
फिर से बढ सके जिन्दगी कि राहो पर
सब कुछ हस के भूल जाना सीख ले

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