Monday, October 6, 2008

उसका साथ

जो khwab छुपे है तेरी आँखों में,
उन्हें मेरी आँखों में खो जाने दो
yaad रहे कुछ dunia में ,
मुझे इतना अपना हो जाने दो

तेरी बातो के नशे में दिलबर
हम sari रात खोये रहे
मेरी khwabo में भी तुम आते रहे,
हम चाहे सोये रहे

हर कदम पर लगता है हमको,
की मेरा हमकदम मेरे साथ है
हर मोड़ पर लगता है जैसे,
मेरे hath में उसका हाथ हो





1 comment:

BrijmohanShrivastava said...

याद रहे न कुछ दुनिया में मुझे इतना अपना हो जाने दो =बहुत सुंदर बात =सूफी साहित्य में भी यही विशेषता थी की दो तरफा होती थी उनकी रचनाएं / ईश्वर से लौ लगाने वाली एवं सांसारिक भी /आप की ये बात भी बिल्कुल दोनों ओर का संकेत देती है /हर कदम पर लगता हम को मेरा हम दम मेरे साथ है /यदि इस लाइन को आध्यात्म से जोड़ दो तो ऐसी बात हो जाए की बडे बडे विद्वान् भी मान जाएँ /२४ घंटे परमात्मा की अनुभूति की वह हमारे साथ है -यही भक्त का लक्षण है और यदि इसे सांसारिक में लें तो प्रेम में भी ऐसी अनुभूति होना ही चाहिए अन्यथा वह प्रेम नहीं फरेव है