क्यों दूर दूर हमसे वो होने लगे
क्यों प्यार के लम्हे खोने लगे
साथ जीने की साथ ख्वाहिश थी
उनकी ख्वाहिशो से हम दूर होने लगे
साथ जो पल जिये क्या वही थे काफी
अब और साथ की तुम्हे जरूरत नही
मेरी मुहब्बत न कम हुई है तुमसे
शायद मैं तुम्हारे मुहब्बत के काबिल नही
पास हो के तुमने शायद ये पाया होगा
तुम्हारे ख्वाबो के मूरत मैं हूँ नही
वक़्त शायद तुमने खो दिया मुझपर
उस वक़्त से कीमती मेरे लिए कुछ नहीं