Wednesday, June 17, 2020

Meri Parchai

जो आईने में ये जो दिखता है
दो रूप है या शायद मेरी परछाई है
इन आँखों की चमक के दुनिया के लिए
पर ये आंखे कितने दर्द छुपाई है

लोग मुस्कुराहट तो देख लेते हैं
आंखों का दर्द कहाँ कोई पढ़ पाता है
बाहर का दिखावा  है सब
मन से अंदर कहाँ कोई झांक पाता है

इस मन मे शांति की गहराई है
तो कभी भावनाओ का तूफान भी है
कभी सब खो देने का डर भी है
कभी सब पा लेने का अरमान भी है

खुशनसीब है वो लोग जिनको
भावनाओं को समझने वाला मिल पाता है
कुछ कही बातो के पीछे छुपी 
अनकही बातो को परखने वाला मिल जाता है