कुछ लोगो ने कमी ना की
मेरी आँखों के आँसू न दिखे
उनकी आंखों में नमी ना थी
वो अब भी दुनियादारी ले कर बैठे है
मेरी दुनिया ही अधूरी हो गयी
मेरी जिंदगी को मझदार में छोड़
उनकी जिंदगी कैसे पूरी हो गयी
अब भी अहसास है हर कोने में
शायद शाम ढले लौट आओ गे
फिर छेड़ कर चुपके से
फिर जोर से मुस्कुराओ गे
हर बार तुम साथ हो ये सोच
मैं आगे तो बढ़ना चाहती हूँ
तुम्हारे हाथों का अहसास ले कर
जो तुमने चाहा करना चाहती हु