जाने क्यों हर बार खुद को अकेला पाती हूँ
जिंदगी हर मोड़ पर एक तूफान देती रही
कभी कभी मुश्किलो से लड़ के थक जाती हूं
मेरी अंदर की शक्ति को कोई तोड़ देता है
हर साथी हमे कही न कही छोड़ देता है
किसी को जीवन साथी कहाँ कह पाती हूँ
जाने क्यों हर बार खुद को अकेला पाती हूँ
कुछ बातों में एक से थे कुछ में अलग भी थे
कभी हम सही थे तो कभी अलग भी थे
कुछ समझा था , कुछ समझ नही पाती हूँ
जाने क्यों हर मोड़ पर खुद को अकेला पाती हूँ