Tuesday, February 11, 2025

मैं कुछ ना सुन पाई

 तुमने जाना चाहा, 

मैं रोक भी नहीं पाई,

तुमने कुछ बताया नहीं, 

या मैं कुछ सुन न पाई।


कुछ अधूरा सा लगता है,

तुम्हारे जाने के बाद,

अकेली सी क्यों लग रही,

नही चाहिए जमाने का साथ।


मेरी सारी बाते समझ कर,

हर दर्द पल मे मिटा देते हो,

आँसू भी ना आ पाते है,

तुम पल में हँसा देते हो।


हर ओर तुम्हें ढूँढती हूँ,

हर लम्हे में है तन्हाई,

तुमने कुछ बताया नहीं,

या मैं कुछ ना सुन पाई।