Friday, November 28, 2008

कैसे बताऊ... क्या हो तुम

हर अहसाह में ऐ दोस्त तुम बसा रखा है
दिन के हर एक कोने में तुम्हे छुपा रहा है
क्या मिलता है तेरे साथ में..... ये तो जानू मैं
पर मैंने बस तुमको ही अपना हमराज बना रखा है

जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी हो तुम
खुदा का सबसे प्यारा तोहफा हो तुम
मेरे आंखो का सपना भी तुम हो
मेरी सब रात... सब सुबह हो तुम

कैसे बताऊ मेरे लिए क्या हो तुम
कैसे बताऊ मेरी जिंदगी का दूसरा नाम हो तुम

Monday, November 3, 2008

मुझ में तुम हो

मेरी हर धड़कन में , मेरी हर सासों में
तुम ही तो है बस मेरे अहसासों में
मेरे सपनो में , मेरे वादों में
तुही बसा है मेरी सब यादो में

उड़ते हवा की साज में तू है
उन चिडियों की आवाज में तू है
मेरे हर एक दिन में तू है
मेरी हर एक रात में तू है

चंद में तू है, तू ही है तारो में
पतझड़ में तू है, तू ही बहारो में
फूलो के सब रंगों में तुम हो
हवा में उड़ती पतंगों में तुम हो

बस तुमसे मैं हूँ ... बस मुझमे तुम हो