कभी कभी उदास सी
ये जिंदगी होने लगती है
जैसे हर उम्मीद हर चाहत
खोने सी लगती है
ना आँखों में कोई चमक
ना होंठो पर कोई मुस्कान
ना जाने क्यों ठरता नहीं
जैसे कोई समंदर का तूफान
मन करता है जैसे
कही दूर निकल जाऊ
जहाँ शायद हो कुछ खुशिया
किसी उम्मीद से मिल जाऊ
ख्वाहिशो को रोका है
जरूरतों को टोका है
कुछ वक्त माँगा है
पर ये वक़्त ही तो धोखा है
पर वक़्त ही तो कहता है
कुछ पल ठहर जाये
शायद् आने वाले पल में
जिंदगी से मिल जाये