छुप के बादलों की परछाई में
छलकती नदी की गहराई में ॥
रूकती चलती हवाओ में
धीरे से आती सुबहो में॥
बस एक सूरत नजर आई
बस तेरी मूरत नजर आई
चाँद की मध्यम चाँदनी में
तारो की टिमटिम रोशनी में
सुबह की शीतल किरन में
बूंदों की एक छ्न छ्न में
बस तेरा ही तेरा है साया
बस तू ही तू नजर आया
शोर में तन्हाई में ...
सोच की गहराई में
दिल हर एक अहसासों में
उठती गिरती सब सासों में
बस एक पैगाम नज़र आया
बस तेरा नाम नज़र आया
5 comments:
sundar likha hai
भाव और विचार के श्रेष्ठ समन्वय से अभिव्यक्ति प्रखर हो गई है । विषय का विवेचन अच्छा किया है । भाषिक पक्ष भी बेहतर है । बहुत अच्छा लिखा है आपने ।
मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-
http://www.ashokvichar.blogspot.com
wahh wahhh aapki apni baat or chitta dono sundar hai....swagat hai....mere blog par bhi padharen
Jai Ho Magalmay Ho
sundar soochana dene ke liye badhai ho.blog ki is duniya me apka swagat hai
sundar soochana dene ke liye badhai ho.blog ki is duniya me apka swagat hai
Post a Comment