Tuesday, January 27, 2009

बस तू ही.....

छुप के बादलों की परछाई में
छलकती नदी की गहराई में ॥
रूकती चलती हवाओ में
धीरे से आती सुबहो में॥

बस एक सूरत नजर आई
बस तेरी मूरत नजर आई

चाँद की मध्यम चाँदनी में
तारो की टिमटिम रोशनी में
सुबह की शीतल किरन में
बूंदों की एक छ्न छ्न में

बस तेरा ही तेरा है साया
बस तू ही तू नजर आया

शोर में तन्हाई में ...
सोच की गहराई में
दिल हर एक अहसासों में
उठती गिरती सब सासों में

बस एक पैगाम नज़र आया
बस तेरा नाम नज़र आया

5 comments:

के सी said...

sundar likha hai

Dr. Ashok Kumar Mishra said...

भाव और विचार के श्रेष्ठ समन्वय से अभिव्यक्ति प्रखर हो गई है । विषय का विवेचन अच्छा किया है । भाषिक पक्ष भी बेहतर है । बहुत अच्छा लिखा है आपने ।
मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Unknown said...

wahh wahhh aapki apni baat or chitta dono sundar hai....swagat hai....mere blog par bhi padharen

Jai Ho Magalmay Ho

Dr. Virendra Singh Yadav said...

sundar soochana dene ke liye badhai ho.blog ki is duniya me apka swagat hai

Dr. Virendra Singh Yadav said...

sundar soochana dene ke liye badhai ho.blog ki is duniya me apka swagat hai