Friday, June 12, 2009

बस तुम्हारी

तू अहसास है कोई दिल का
या धड़कन की आवाज है तू
कोई मीठी सी धुन है
कोई सुरीला साज़ है तू

जिस ओर भी गए हम
तू मेरे पास तो है
तू पास है या नही
पर साथ तेरा अहसाह तो है

हर बार तेरी कोई बात
होठो पर मुस्कान दे जाती है
हर बार तेरी यादे
कोई मीठा सा दर्द दे जाती है

हम दूर तो है ...
पर कुछ पल बाद पास आना है
उस पल के बाद
बस तुम्हारी हो जाना है

Tuesday, June 9, 2009

तेरी यादे


खुश हु या नही ....
दिल को ये अहसास नही है
पर गम तो है दिल में
की तू मेरे पास नही है

जब सोचा मैंने ....
जिंदगी में गम ही गम है
पर साथ थे कभी हम तुम
ये भी क्या कम है

कुछ पल तो थे वो
जब इतने पास थे तुम
हर एक सुबह में थे
थे हर एक रात में तुम

पल भर में इतने दूर से
हमे तुम क्यू लगने लगे
कभी खवाइश में जगने थे
अब यादो में जगने लगे

Monday, June 8, 2009

उनके खयालो में ,,,,,

उनकी बातो में खोये थे इस तरह
जाने कैसे सुबह से रात हो गई
यु ही अकेले चले थे राह पर हम
उनसे कही मेरी मुलाकात हो गई

आसमा से जमीन तक जहाँ देखा
बस आँखों को तुम नज़र आने लगे
खामोशी में भी कई बार ऐ दिलबर
किस्से बाते कई तुम सुनाने लगे

तेरे अल्फाज़ बन धुन कोई
कानो में बजने से लगते है
जो पल साथ रहे हम दिल
वो पल सपने से लगते से

कुछ बातें कुछ मुलाकाते
कुछ किस्से , कुछ बातें
सब तुझ से शुरू होने लगी
तुझ पर ही खत्म होती है बातें

Friday, June 5, 2009

तुम अपने लगने लगे

आँखों में कुछ खवाब नए जगने लगे
धीरे धीरे आप मुझे अपने लगने लगे
कुछ कदम साथ चल कर मेरे
जिंदगी के साथी तुम लगने लगे

मेरे ख्वायिशो में भी तुम्हारा रंग है
हर पल तू मेरे संग है
हर पल में कई पल चलने लगे
धीरे धीर आप मुझे अपने लगने लगे

हर ख्याल में तेरा ही ख्याल है
तू जवाब और तू ही सवाल है
दिल की हर बात तुमसे कहने लगे
धीरे धीरे से आप मुझे अपने लगने लगे








Wednesday, June 3, 2009

खवाब

जिंदगी से कुछ पल चुरा लू मैं
आसमा थोड़ा सा अपना बना लू मैं
उड़ कर छु लू सितारों का कहा कोई
जिंदगी एक खुबसूरत सपना बना लू मैं

कुछ ऐसा पाने ख्वाईश दिल में जगी
दुनिया कुछ बदली सी मुझे लगी
बदले से हम या बदले से सब है
रहे सब मुझ को अलग सी लगी

कल के डर को दूर कर दिया कही
जिस और चले बना लू मंजिल वही
कुछ अलग सा महसूस हो रहा है दिल में
सुन रहा है मन कुछ बाते अनकही

Tuesday, June 2, 2009

असमंजस

जिस राह पर चल निकले है हम
न जानू वो राह सही या नही
जिस ओर बढ गए है कदम
उसकी कोई मंजिल है या नही

कुछ पल को तो उजाला था
पर आगे अँधेरा क्यू दिखता है
कुछ पल को जो दी थी खुशी
उससे आगे गम सा क्यू दिखता है

जिंदगी एक अनकही सी अनजानी सी
पहेली सी लगती है क्यू लगती है
क्यू तनहाइया दिल में अब
कुछ काँटों सी चुभती है