उनकी बातो में खोये थे इस तरह
जाने कैसे सुबह से रात हो गई
यु ही अकेले चले थे राह पर हम
उनसे कही मेरी मुलाकात हो गई
आसमा से जमीन तक जहाँ देखा
बस आँखों को तुम नज़र आने लगे
खामोशी में भी कई बार ऐ दिलबर
किस्से बाते कई तुम सुनाने लगे
तेरे अल्फाज़ बन धुन कोई
कानो में बजने से लगते है
जो पल साथ रहे हम दिल
वो पल सपने से लगते से
कुछ बातें कुछ मुलाकाते
कुछ किस्से , कुछ बातें
सब तुझ से शुरू होने लगी
तुझ पर ही खत्म होती है बातें
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