कुछ कहने की ख्वाइश थी
पर जुबा खामोश रह गई
आँखों ने भी कुछ कहना चाहा
पर वो भी चुप रह गई
इतना समझते हो मुझे
मेरे दिल की ये बात समझ न पाते हो
कई तो शायद तुम भी
मन की बाते सब न कह पाते हो
इतना अपनापन तो है फिर भी
जाने क्यू थोडी सी दुरी है
सब कुछ न कह पाने की
क्या इस दिल की मज़बूरी है
इससे हम भी अनजाने है
और तुम भी अनजाने हो
कभी सबसे करीब हो दिल के
कभी लगते सबसे अनजाने हो
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