Monday, December 22, 2008

तेरा अहसाह ....

मुस्कान तेरी चुपके से आ के
मेरे होठो पर छा जाती है
एक चमक सी आँखों में
तेरे आने से आ जाती है

तेरे एक आवाज कानो में
सुर कई छेड़ देती है
तेरी सांसे भी चुपके से
सब कुछ मुझे से कह देती है

हवा की ठंडी कभी कभी
तेरे साथ का अहसाह दिलाती है
जैसे तुने छु कर भेजा हो
ऐसे मुझे को छु जाती है


चाँद में भी अक्सर मुझ को
सूरत तेरी ही दिखती है
हर एक चीज में दुनिया की
मूरत तेरी ही दिखती है

No comments: