हम जैसे आगे चलते गए
कुछ अजनबी अपने बने
कुछ अपने अजनबी बनते गए
दुनिया की साथ ले कर चलना
तो शायद मुमकिन ना था
तो अपनी छोटी सी दुनिया ले के
अपने साथ हम चलते गए
ज्यादा लोगो से तो नहीं चाहा मैंने
बस इतनी सी चाहत है दिल में
जब मुस्कुराऊँ देख कर उनको
तो वो भी चाहे धीरे से मुस्कुरा दिए
क्या खोना है हमको यहाँ
क्या पाना है हमको यहाँ
बस कुछ ऐसे रिश्तो की चाहत है
जो जाने के बाद भी हमको जिए
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