Wednesday, December 20, 2017

एक चक्र सी जिंदगी

मेरी जिंदगी जाने क्यों
 एक चक्र सी लगती है 
कुछ पल बढ़ने के बाद ,
जिंदगी फिर वैसी ही लगती है 

फिर कोई आ जाता है 
जो किसी भूले को याद दिला देता है 
कुछ बाते ऐसी ऐसी कर जाता है 
धड़कन को बढ़ा देता है 

कुछ बाते अंजनी सी सुनी सुनी सी लगती है 
कुछ पल बढ़ने के बाद ,
जिंदगी फिर वैसी ही लगती है 

ना वापस जाने की ख्वाइश है 
फिर भी कोई खींचता है 
क्यों ये पल वापस आया 
दिल ये ही सोचता है 

क्यों नए अध्यायों  में 
कोई पुरानी किताब  सी लगती है 
कुछ पल बढ़ने के बाद ,
जिंदगी फिर वैसी ही लगती है 

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