तुम्हारी दो पल की बातें
दिन भर मुस्कराहट देती है
एक ख़ुशी सी मेरे होंठो पर
आजकल छाई रहती है
थोड़ा मुश्किल सा था
तुमको दोस्त मान पाना
पर ये गलती थी मेरी
ये अब है मैंने जाना
बाते ख़त्म नहीं होती
जब तुमसे बात होती है
न मिले कबसे तुमसे जाने कैसे
रोज़ तुमसे मुलाकात होती है
शायद कोई धागा होता है
जो दिलो को बांध देता है
जो दूरिया होने पर भी
किसी को अपना मान लेता है
दिन भर मुस्कराहट देती है
एक ख़ुशी सी मेरे होंठो पर
आजकल छाई रहती है
थोड़ा मुश्किल सा था
तुमको दोस्त मान पाना
पर ये गलती थी मेरी
ये अब है मैंने जाना
बाते ख़त्म नहीं होती
जब तुमसे बात होती है
न मिले कबसे तुमसे जाने कैसे
रोज़ तुमसे मुलाकात होती है
शायद कोई धागा होता है
जो दिलो को बांध देता है
जो दूरिया होने पर भी
किसी को अपना मान लेता है