Monday, January 22, 2018

मुस्कराहट

तुम्हारी दो पल की बातें
दिन भर मुस्कराहट देती है
एक ख़ुशी सी मेरे होंठो पर
आजकल छाई रहती है

थोड़ा मुश्किल सा था
तुमको दोस्त मान पाना
पर ये गलती थी मेरी
ये अब है मैंने जाना

बाते ख़त्म  नहीं होती
जब तुमसे बात होती है
न मिले कबसे तुमसे जाने कैसे
रोज़ तुमसे मुलाकात होती है

शायद कोई धागा होता है
जो दिलो को बांध देता है
जो दूरिया होने पर भी
किसी को अपना मान लेता है






Sunday, January 14, 2018

जाने कैसे

जाने कैसे अपने अहसास बदलने लगे 
जाने कैसे तुम दोस्त खास बनने लगे 
जाने कैसे अपनी जान पहचान बदल गई 
जाने कैसे तुमसे हर बात करने लगे 

जाने कैसे तुमको हमराज बना लिए 
जाने कैसे तुमको अपना हाल सुना दिए 
जाने कैसे तुम्हारी बात का इंतज़ार करने लगे 
जाने जैसे तुम जिंदगी में शामिल हो गए 

शायद दिल को एक दोस्त की तलाश होगी 
शायद मन में कोई अनकही बात होगी 
शायद दिल कोई जोड़ता कोई तार होगा 
शायद किसी मकसद से अपनी मुलाकात होगी 




Friday, January 5, 2018

बदली राहे


खत लिखती हूँ , फिर फाड़ देती हूँ 
कि तुम कुछ और न समझ जाओ 
मेरे अल्फ़ाज़ कुछ और बोले 
तुम उसे इजहार न समझ जाओ 

तुम्हे एक दोस्त समझा था लेकिन 
तुम्हारे दिल में अहसास कुछ और थे 
तुम्हे हमराज बनाया था लेकिन 
तुम्हारे राज़ कुछ और थे 

फिर ख़ामोशी को मैंने अपना लिया 
कि तुम फिर न इधर आओ 
मेरे अल्फ़ाज़ कुछ और बोले 
तुम कुछ और न समझ जाओ 

ना दोस्त बन पाए न हमराज़ 
ना कोई और नाम दे पाए 
ख़ामोशी को ही अपना लिया 
बदल  ली अपनी राहे 


Wednesday, January 3, 2018

कुछ अनकही

वो धीरे से मुस्कुरा कर 
मेरी मुस्कराहट छीन लेते है 
वो धीरे बोल के निकल जाते है 
मेरी नींदें छीन लेते है 

न कुछ बोल पाते है 
न चुप ही रह पाते है 
जो अनकही सी रह जाती है 
वो इतनी सारी  बाते है 

शायद खामोशिया मेरी 
सब कुछ ठीक कर देंगी 
जो कह कर न कह सके 
वो तुमको बयां कर देगी