शायद कोई दुआ थी जो मिलके तुमसे कबूल हो गयी
सारे जहाँ की खुशिया तुमसे मिलकर नसीब हो गयी
मुहब्बत के भी कई मुकाम होते है सुना था मैंने
कुछ दूर तुम्हारे साथ चल कर मजिल करीब हो गयी
उसकी आवाज में भी कोई जादू है शायद
कि हर लफ्ज के साथ जिंदगी उसके नाम हो गयी
पाना खोना तो शायद उसूल है दुनिया का
ख्वाहिश तुम्हे पा कर कभी न खोने की पैगाम हो गयी
हर लम्हा हर पल जो तेरे साथ गुजरा है हमने
यु लगा कि तन्हाइयो में मैं तुम्हारे साथ हो गई
हर मौसम अब खुशनुमा सा लगने लगा है हमे
तुम्हारे साथ हर लम्हे में प्यारी से एक बात हो गयी
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