जीवन पथ पर मैं अकेले चली थी
किसी खूबसूरत मोड़ पर तुम मिले
हाथ ले कर हाथो में अपने
साथ हम जीवन पथ पर बढ़ चले
माता पिता पूजनीय थे अपने
परंतु वो भी इस पथ पर छोड़ गए
बच्चे हर्दय का अभिन्न अंग थे
वो भी अपने साथी संग रास्ते मोड़ गए
हर दुख ने , हर सुख में, हर दशा ने
तुम साथ थे साथ ही रहे सदा
एक छोटी सी कहानी सा लगता है
इस जीवन का हर पल अपना
इसमे खुशी भी है तो गम भी है
इसमे प्यार भी है तकरार भी है
इसमे सालो का साथ भी है
इनमे कुछ पलों का इंतज़ार भी है
इस प्रेम और समर्पण का
कुछ पल नही जीवन भर का साथ है
मेरे हर धड़कन में जीवन है
जो हाथ मे तुम्हारा हाथ है
No comments:
Post a Comment