Monday, October 12, 2020

बचपन की कहानी

 आज भी बचपन की कहानी याद आती है

हमारा ख्याल रखती दादी नानी याद आती है

वो किसी धागे से बांध देती थी सारा परिवार

कैसे मिल कर मनाते थे हम सारे त्योहार

वो होली में अनगिनत रंगों में रंग जाना

दशरहे पर मेला सब बच्चो का साथ में जाना

घर मे जाते ही ढूंढते थे बाबा की अलमारी

उन बिस्किट के पैकेट में छुपी थी खुशी हमारी

वो घंटो बाबा से सुनना अपने पूर्वजो की बातें

हँसते खेलते कट जाती थी सारी दिन रातें

अम्मा ने सारे रस्म सारे व्रत सबको सिखाये

वही त्योहार सारे परिवार को जोड़ते आये

नाना नानी ढेरो खिलोने ले कर आना

बच्चो से साथ फिर बच्चो सा बन जाना

आज चाहे रिश्तो में थोड़ी दी दूरी है

बाबा दादी नाना नानी बच्चो के फिर भी जरूरी है

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