Monday, October 13, 2008

मेरे ख्वाबो को तेरे ख्वाबो का आसरा जो मिल गया
खुशियों से मेरे जहाँ का फूल हर एक खिल गया

महका महका सा लगने लगा हर एक हवा का झोका
रंगीन सी लगने लगी उड़ते बादल की हर घटा

चाँद हर पर रूप बदलता सा लगने लगा है मुझे

Monday, October 6, 2008

उसका साथ

जो khwab छुपे है तेरी आँखों में,
उन्हें मेरी आँखों में खो जाने दो
yaad रहे कुछ dunia में ,
मुझे इतना अपना हो जाने दो

तेरी बातो के नशे में दिलबर
हम sari रात खोये रहे
मेरी khwabo में भी तुम आते रहे,
हम चाहे सोये रहे

हर कदम पर लगता है हमको,
की मेरा हमकदम मेरे साथ है
हर मोड़ पर लगता है जैसे,
मेरे hath में उसका हाथ हो





साज़ दिल का

किसी की आहट सुन के दिल ये मुस्कुरा दिया
उसके धड़कन के सुर में , मेरे सांसो में सुर मिला दिया
उसकी हलकी सी चुअन, इस मन को छु गई
वो मुस्कुराये को होठो में गीत कोई गा दिया

मैं छुप छुप के उनकी तस्वीरे देखती रही
आ कर सामने उसने साज दिल का बजा दिया
कहते रहे कुछ बात हम ख़ुद से ....
यु लगा जैसे कुछ सुन के वो मुस्कुरा दिया

अकेलापन ........

ना जाने जिन्दगी में और कितने गम है
ना जाने कितनी राते और मेरी नम है
दूर से तो अपनों की भीड़ सी लगती है
पास जा के देखो तो बस अकेलापन है

कुछ सूना सा , कुछ खाली सा अदंर है मेरे
जहन में खयालो का समंदर है मेरे
धुंद लेती है तनहईया मुझे हर कोने में
जैसे हर सोच में तनहई का घर है मेरे

दुनिया देखती करती रही मुस्कान मेरी
देख ना पाया कोई उनके पीछे एक दुनिया अँधेरी
कोई ऐसा मिला दुनिया में कहीं
जो जमाझ जाए बिन कहे सब बातें मेरी

चुप से हम अकेले से किसी मोड़ पर कही
ढूढ़ते रहे किसी अपने को, पर मिला कोई नही
बस चुभती रही तन्हाई इन धडकनों को
बैठे रहे गमसुम तनहा अकेले से यु ही







Wednesday, October 1, 2008

तन्हाई

उसकी यादो से हुए करीब इतना
कि सारी दुनिया से दूर हम जाने लगे
अकेले क्यू होने लगे हम इतना
कि आंसू तनहइयो में रुलाने लगे

चुप सा हम भीड़ का कोना क्यू है
क्यू आज किसी आह्ट का इंतजार नही
क्यू सांसो में अकेलापन है ,
इस पल में क्यू किसी का साथ नही

उसने तो चुन ली रह दूर जाने के लिए
दिल ने चाह मैं उसी राह पर चली जाऊ
पर उसकी हम सफर बन सकू गी मैं
दिल को ये बात कैसे समझाऊ

शायद वक्त के साथ अकेलेपन से दोस्ती हो जाए
हम फिर से मुस्कराना सीख ले
फिर से बढ सके जिन्दगी कि राहो पर
सब कुछ हस के भूल जाना सीख ले