ए जिंदगी ये वाक्या कुछ अजीब हो गया
एक अजनबी अपने इतना करीब हो गया
वक़्त पहले भी गुज़र है जाता था पहले
अब उसका साथ होना ही सबसे अजीज हो गया
ख्वाबो में भी अब बस उनसे मुलाकात रहती है
जब पास ना हो तो भी कानो में उनकी बात रहती है
है फरक नहीं की उन्हें मैं याद रहु या ना रहु
हर पल में जाने क्यों उनकी ही याद रहती है
उसे सोचती हूँ इतना , उसे चाहती हूँ उन्हें इतना
है वो इतना मेरे दिल में , सागर में पानी जितना
एक अजनबी अपने इतना करीब हो गया
वक़्त पहले भी गुज़र है जाता था पहले
अब उसका साथ होना ही सबसे अजीज हो गया
ख्वाबो में भी अब बस उनसे मुलाकात रहती है
जब पास ना हो तो भी कानो में उनकी बात रहती है
है फरक नहीं की उन्हें मैं याद रहु या ना रहु
हर पल में जाने क्यों उनकी ही याद रहती है
उसे सोचती हूँ इतना , उसे चाहती हूँ उन्हें इतना
है वो इतना मेरे दिल में , सागर में पानी जितना
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