Sunday, March 4, 2018

आदत

ना सोचा था यु आपसे इबादत हो जायेगी 
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी 

ना तुम्हारी आँखों में देखा 
ना तुम्हारी सांसो को महसूस किया 
एक कशिश तुम्हारी आवाज़ में शायद 
तुम्हारी हर बात ने तुम्हारे करीब किया 

पर ख्वाहिशे मिलने की कब पूरी हो पायेगी 
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी 

तुम पास तो नहीं हो फिर भी 
पास तुम्हे हर पल महसूस करते है 
पाया नहीं नहीं ना पा सकेगे कभी 
फिर भी क्यों खोने से डरते है 

जो न अपना है उससे कैसे चाहत हो जाएगी 
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी 


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