ना सोचा था यु आपसे इबादत हो जायेगी
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी
ना तुम्हारी आँखों में देखा
ना तुम्हारी सांसो को महसूस किया
एक कशिश तुम्हारी आवाज़ में शायद
तुम्हारी हर बात ने तुम्हारे करीब किया
पर ख्वाहिशे मिलने की कब पूरी हो पायेगी
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी
तुम पास तो नहीं हो फिर भी
पास तुम्हे हर पल महसूस करते है
पाया नहीं नहीं ना पा सकेगे कभी
फिर भी क्यों खोने से डरते है
जो न अपना है उससे कैसे चाहत हो जाएगी
कि मेरे सब लम्हो को आपकी आदत हो जाएगी
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