सब कुछ अलग है सब कुछ जुदा है
फिर भी कुछ तो दिल से जुड़ा है।
कोई तो डोर जो बांधे हमे
की न मै जा सकी न तू जा सका है।
कुछ रिश्ते सालो में अपने नहीं हो पाते
कुछ लोग पल में ही खास हो जाते है।
मन अपना मिल गया है जैसे
दिल के दो हिस्से जुड़ जाते है।
तुमने मुझे ढूंढा है या तक़दीर ने
शायद अपना मिलना कही लिखा हो।
पहले क्यों नहीं ये वक़्त आया
यही जैसे ये दिल पूछता हो।
अब बस इतनी सी है ख्वाहिश
की मेरे साथी मेरे हमराज़ बन कर।
चलते रहना तुम साथ मेरे
मेरे धड़कनो के सब जज्बात सुनकर।
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