कह देते है वह
तुम में थोड़ा सा धैर्य नहीं
पर शायद उनके साथ
धैर्य रखना ही नहीं चाहती हूँ
कहते हो तुमसे हर पल
नाराज़ हो जाती हूँ
शायद इतने अपने हो
की हर जज्बात जाताना चाहती हूँ
ख़ामोशी से ही अक्सर
हर जज्बात जताया है
तुमको अपने जज्बात
शब्दों से बताना चाहती हूँ
तुम समझे या नहीं
इसका भरम नहीं रखना
शायद इस लिए हर अहसास
तुमको खुद जाताना चाहती हूँ
तुम में थोड़ा सा धैर्य नहीं
पर शायद उनके साथ
धैर्य रखना ही नहीं चाहती हूँ
कहते हो तुमसे हर पल
नाराज़ हो जाती हूँ
शायद इतने अपने हो
की हर जज्बात जाताना चाहती हूँ
ख़ामोशी से ही अक्सर
हर जज्बात जताया है
तुमको अपने जज्बात
शब्दों से बताना चाहती हूँ
तुम समझे या नहीं
इसका भरम नहीं रखना
शायद इस लिए हर अहसास
तुमको खुद जाताना चाहती हूँ
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