Friday, February 16, 2018

उदासी

जाने क्यों इस महफ़िल में तन्हाई सी लगती है
जाने क्यों चुभती अपनी परछाई सी लगती है 

क्यों अकेलापन क्यों हर और तन्हाई सी है
जाने क्यों किसी ख़ुशी में भी उदासी छाई  सी है 

जैसे कोई धड़कन से सारे अहसास ले गया
जैसे कोई मेरे मन से सारी बात ले गया 

कुछ गलत है क्या जो हमसे हो गया
कुछ बहुत अजीज सा या हमसे खो गया 

कुछ तो वजह होगी जो मन इतना उदास है
चुप चुप से हम , चुप चुप से सब अहसास है 





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