जाने क्यों इस महफ़िल में तन्हाई सी लगती है
जाने क्यों चुभती अपनी परछाई सी लगती है
जाने क्यों चुभती अपनी परछाई सी लगती है
क्यों अकेलापन क्यों हर और तन्हाई सी है
जाने क्यों किसी ख़ुशी में भी उदासी छाई सी है
जैसे कोई धड़कन से सारे अहसास ले गया
जैसे कोई मेरे मन से सारी बात ले गया
कुछ गलत है क्या जो हमसे हो गया
कुछ बहुत अजीज सा या हमसे खो गया
कुछ तो वजह होगी जो मन इतना उदास है
चुप चुप से हम , चुप चुप से सब अहसास है
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