क्या हो तुम मुझसे पूछो
कभी खुद तो मेरी नज़रो से भी देखो
कभी समुन्द्र से शांत हो तुम
कभी नदी से भी चंचल
कभी हवा से शीतल हो तुम
कभी तुफानो से कोई हलचल
क्या है मन में मेरे तुमभी समझो
कभी खुद तो मेरी नज़रो से भी देखो
कभी खुली किताब हो तुम
कभी बंद दरवाजे सा कोई राज़
कभी एक रात से शांत हो तुम
अभी किसी मदुर गीत की आवाज़
तुम अपनी सारी खूबी मेरी आँखों में पढ़ लो
कभी खुद को मेरी नज़रो से भी देखो
कभी खुद तो मेरी नज़रो से भी देखो
कभी समुन्द्र से शांत हो तुम
कभी नदी से भी चंचल
कभी हवा से शीतल हो तुम
कभी तुफानो से कोई हलचल
क्या है मन में मेरे तुमभी समझो
कभी खुद तो मेरी नज़रो से भी देखो
कभी खुली किताब हो तुम
कभी बंद दरवाजे सा कोई राज़
कभी एक रात से शांत हो तुम
अभी किसी मदुर गीत की आवाज़
तुम अपनी सारी खूबी मेरी आँखों में पढ़ लो
कभी खुद को मेरी नज़रो से भी देखो
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