मैं तुम्हे भूलती नहीं कभी
पर तुम्हे याद ना आती कभी
मेरी अहमियत क्या है तुम्हे
ये मै समझ पाती नहीं
पल में सबसे अजीज बनाना
पल में अनजान कर देना
पल में सब कुछ भुला देना
पल में सब याद कर लेना
तुम्हे कैसे मैं समझू
मन पूछता है कई बार
इतनी दूर हो मुझसे
न जानू इकरार है या इंकार
शायद पास होते तुम तो
तुम्हारी आँखों को पढ़ पाती
जो कह कर न कह पायी
वो सारी बात कह पाती
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