Tuesday, September 30, 2008

कहीं दूर ..... जा रहे हम

हम अहसासों में ढुते रहे अपनी दुनिया
उन अहसासों से आगे एक हकीकत भी है
हम ढुते रहे उनकी आँखों में चाहत
सोचा की उनको क्या हमसे मुहबत भी है

उन्होंने ने कह दिया अब दूर तुम्हे जाना होगा,
इन धडकनों से कैस दूर जा पाओ गे तुम
आँखों के सामने से दूर जा भी सकते हो
ये बता दो , यादो में कैसे आओ गे तुम

तुमने कभी कहा तो नही कि तुम्हे भी प्यार है
फ़िर भी दिल को एतबार था अपने अहसासों पर
फिर भी प्यार दिल से करते रहे हम
देते रहे हम तुम्हे हक हमारी सांसो पर

बस ये ही दुआ है है मेरी, खुश रहो सदा तुम
हम भी रह लेंगे खुश की दूर कही खुश तुम हो
बन सके हम हिस्सा तुम्हारी जिन्दगी का
मेरी जिंदगी एक अटूट हिस्सा तुम हो

Saturday, September 27, 2008

मुझे मुसे ज्यादा जान लेते हो तुम ...........

मेरे हर ख्याल का ख्याल है
तुम्हे
मेरे हर ख्वाब को अपना मानते लेते हो
तुम
बिन बोले समझ लेते हो मेरी बातें
शायद मुझ से भी ज्यादा जान लेते हो

तुम
मेरे हर धड़कन का सुर तुम्हे याद है
मेरी
हर आहट पहचान लेते हो
तुम
उदासी गर छू भी जाती है
मेरे
मन को उदास होठो को भी मुस्कान देते हो

तुम
मेरी हर चाह , हर ख्याल का ख्याल है
तुम्हे
मेरे ख्वाब को ऊँची उड़ान देते हो
तुम
जमीं पर तो हमेशा से थे हम
तुम मुझे सारा आसमान देते हो

Friday, September 26, 2008

बस तुमको ही चाहा है ..........

हवाओ की सनसनाहत में, वक्त की हर आहट में
खुले आकाश के साए में, या घने पेड़ छाए में
हर फूल की खुशबु में, हर मौसम के जादू में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

रुकते चलते कदमो में, उठती जुकती पलकों में
आती जाती सांसो में , दिल में चलती हर धड़कन में ,
ऊँगली के सब साजो में , इन होंठो की आवाजो में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

चाँद की चांदनी में , सूरज की रौशनी में
रिमझिम सी बौछारों में , बहती नदी के धारो में
सुनसान सी राहों में , या भीड़ की बाहों में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

बस तुमको ही चाहा है ..........

Thursday, September 25, 2008

मेरे साथी

उड़ती हवाओ ने भी कुछ कहा
बहती धारा भी कुछ कह गई
जाने क्यू हम कुछ कह पाए
क्यू हमारी जुबां चुप रह गई

यु तो घंटो बाते करते रहे हम
पर जो कहना था वो कह
कहाँ पाये
साथ तो सदियों का सा लगता है
ये बात होंठो पर कहाँ लाये

दोस्त , हमदम , साथी , हमराज़
जाने कितने नाम दिए हमने
दिलबर थे एक दूजे के लिए
ये क्यू ना जाना हमने

जो भी नाम दो इस रिश्ते को
पर ये रिश्ता बहुत प्यारा है
दुनिया की भीड़ में बस वो
सच्चा साथी हमारा है

वो गुजरे थे

खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे
एक पल में हो गई सुबह कैसे
कुछ पल पहले अंधेरे थे

उसकी एक मुस्कान जो चुपके दिल को छु गई
हम कुछ ना कह सके , आँखे ही सब कुछ कह गई

यूँ चमकने लगा रूप मेरा
ऐसे हम कभी सवरे थे
खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे

नशा वो मौसम का था , या उनकी बातो का
चाँदनी सा लगने लगा था रंग सब रातो का

हर पल होने लगा खुशनुमा
क्या रात, क्या सवेरे थे
खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे

Wednesday, September 24, 2008

who makes you special

Sometime some day a thought came in my mind
why....... World interfere so much in our life
why world want so much from us
We are part of the society
still we have someone unique in us
that want to fly
to reach the top
to touch the sky
but..... That's not so easy
so many people around you
in from of relatives... in form of friend
that's seems to be your well wisher
but you never feel that
even than we all have someone special in our life
who listen to you
who understands you
and make you all wishes special
sometime we call them true friend
sometime they are our partner
sometime they are family
whatever we call them
they make us special
they make us unique
they believe in our dream
they are with us when we really want someone with us
you make your world with them.....
You make your heaven with them :)
चुपके चुपके आसमा पर बादल छाने लगे
छ्नक छ्न बुँदे बरसाने लगे
चमकने लगी बिजलिया आसमा में ,
फिजाये गीत कोई गुनगुनाने लगे

गीत कोई धड़कन का , इस हवा में है
रंग सात रंगों सा, इस सुबह में है

दो रूप

कभी अश्को में खो जाने को मन करता है
कभी तनहइयो में मुस्कुराने को मन करता है
कभी किसी पास होने की चाह उठती है
कभी सबसे दूर जाने को मन करता है

कभी बढते कदमो को भी रोक लेते है हम
कभी फैला के पंख उड़ जाने को मन करता है
कभी तनहइयो से दोस्ती कर लेते है हम
कभी भीड़ में खो जाने को मन करता है

होते है दो रूप सभी के , दो रंग भी शायद होते है
एक दुनिया जो देखती है , एक जो छुपा हम लेते है
एक पहलू जिसमे दुनिया होती है ,
एक पहलू जिसमे बस हम ही हम होते है

Monday, September 22, 2008

छुपी बाते

कहने को तो बात कई थी
इस दिल में कुछ बात नई थी
फिर भी क्यू चुप से थे दोनों
शायद दिल में कुछ बात छुपी थी

Wednesday, September 17, 2008

मंजिले

लोग कहते है हमे मिल जाती है राहे हमेशा
हम चाहे ना चाहे मंजिले है हमारे लिए
पर लोगो को कहाँ दिखता है
क्या किया है हमने वहाँ तक जाने के लिए

यूं तो राहे हमारी भी आसान तो नही थी
पर उस पर चलने को मैंने ठाना था
जिंदगी फूलो की सेज थी तो नही
बस उसे इतना खुबसूरत बनाना था

लोग हर सफलता को किस्मत का नाम देते है
पर किस्मत भी मेहनत का साथ देती है
जिंदगी भी बस उतना ही वापस करती है
जितना जिंदगी हमसे लेती है

सब कुछ तो मिला नही है है अभी
बहुत पाने की चाह अभी बाकी है
मंजिल अभी भी दूर है मुझेसे
छुना वो आसमा अभी बाकी है

बस चलते जाना है तब तक
छोटी बड़ी मजिलो को पाते हुए
कुछ बनी राहो में चलते हुए
कुछ अपनी राहे बनाते हुए

:)



पंख

क्यूँ रोक देते है कदम हम आगे बढते हुए
क्यूँ लॉन आते है कदम उचाँइयो पर चढ़ते हुए

पंख भी है आसमा भी पास तुम्हारे
बस एक बार उड़ जाना है तुम्हे
हर रह आसान होगी
बस एक बार कदम बढाना है तुम्हे

Tuesday, September 16, 2008

कुछ अनकही बातें

कुछ ना कह सके कई बार हम
उसने मन में क्या है ये पुछा भी था
धडकनो की भाषा वो समझ नही पाए
मुझे लगा कुछ उसने सुना भी था

कुछ अहसास था उसको भी
शायद मेरे अहसासों का
महसूस हुआ ये था मुझे
शायद मेरे अहसास ने उसको छुआ भी था

खामोशी का मतलब ये तो नही
की मेरे दिल में कोई बात नही
शायद लब इस इंतजार में हो
तुम कहो जो तुम्हारे दिल में छुपा भी था