Wednesday, September 17, 2008

मंजिले

लोग कहते है हमे मिल जाती है राहे हमेशा
हम चाहे ना चाहे मंजिले है हमारे लिए
पर लोगो को कहाँ दिखता है
क्या किया है हमने वहाँ तक जाने के लिए

यूं तो राहे हमारी भी आसान तो नही थी
पर उस पर चलने को मैंने ठाना था
जिंदगी फूलो की सेज थी तो नही
बस उसे इतना खुबसूरत बनाना था

लोग हर सफलता को किस्मत का नाम देते है
पर किस्मत भी मेहनत का साथ देती है
जिंदगी भी बस उतना ही वापस करती है
जितना जिंदगी हमसे लेती है

सब कुछ तो मिला नही है है अभी
बहुत पाने की चाह अभी बाकी है
मंजिल अभी भी दूर है मुझेसे
छुना वो आसमा अभी बाकी है

बस चलते जाना है तब तक
छोटी बड़ी मजिलो को पाते हुए
कुछ बनी राहो में चलते हुए
कुछ अपनी राहे बनाते हुए

:)



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