Friday, September 26, 2008

बस तुमको ही चाहा है ..........

हवाओ की सनसनाहत में, वक्त की हर आहट में
खुले आकाश के साए में, या घने पेड़ छाए में
हर फूल की खुशबु में, हर मौसम के जादू में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

रुकते चलते कदमो में, उठती जुकती पलकों में
आती जाती सांसो में , दिल में चलती हर धड़कन में ,
ऊँगली के सब साजो में , इन होंठो की आवाजो में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

चाँद की चांदनी में , सूरज की रौशनी में
रिमझिम सी बौछारों में , बहती नदी के धारो में
सुनसान सी राहों में , या भीड़ की बाहों में
मैंने तुमको ही पाया है, मैंने तुमको ही चाहा है

बस तुमको ही चाहा है ..........

No comments: