उड़ती हवाओ ने भी कुछ कहा
बहती धारा भी कुछ कह गई
जाने क्यू हम कुछ न कह पाए
क्यू हमारी जुबां चुप रह गई
यु तो घंटो बाते करते रहे हम
पर जो कहना था वो कह कहाँ पाये
साथ तो सदियों का सा लगता है
ये बात होंठो पर कहाँ लाये
दोस्त , हमदम , साथी , हमराज़
जाने कितने नाम दिए हमने
दिलबर थे एक दूजे के लिए
ये क्यू ना जाना हमने
जो भी नाम दो इस रिश्ते को
पर ये रिश्ता बहुत प्यारा है
दुनिया की भीड़ में बस वो
सच्चा साथी हमारा है
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