Thursday, September 25, 2008

मेरे साथी

उड़ती हवाओ ने भी कुछ कहा
बहती धारा भी कुछ कह गई
जाने क्यू हम कुछ कह पाए
क्यू हमारी जुबां चुप रह गई

यु तो घंटो बाते करते रहे हम
पर जो कहना था वो कह
कहाँ पाये
साथ तो सदियों का सा लगता है
ये बात होंठो पर कहाँ लाये

दोस्त , हमदम , साथी , हमराज़
जाने कितने नाम दिए हमने
दिलबर थे एक दूजे के लिए
ये क्यू ना जाना हमने

जो भी नाम दो इस रिश्ते को
पर ये रिश्ता बहुत प्यारा है
दुनिया की भीड़ में बस वो
सच्चा साथी हमारा है

No comments: