Thursday, September 25, 2008

वो गुजरे थे

खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे
एक पल में हो गई सुबह कैसे
कुछ पल पहले अंधेरे थे

उसकी एक मुस्कान जो चुपके दिल को छु गई
हम कुछ ना कह सके , आँखे ही सब कुछ कह गई

यूँ चमकने लगा रूप मेरा
ऐसे हम कभी सवरे थे
खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे

नशा वो मौसम का था , या उनकी बातो का
चाँदनी सा लगने लगा था रंग सब रातो का

हर पल होने लगा खुशनुमा
क्या रात, क्या सवेरे थे
खोये खोये थे हम उन लम्हों में
जब तुम मेरे पास से गुजरे थे

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