Wednesday, May 13, 2009

दोराहा

कुछ बदला सा है जहाँ में
जिंदगी कुछ अजीब सा रंग लायी है
एक ओर कल की रौशनी है
एक ओर कल की परछाई है

दिल में उठती कई बार कोई हलचल है
क्या चाहा जिंदगी ने मेरे लिए
क्यू ये अनजाने मोड़ पर गई मैं
कौन सी राह बनी है मेरे लिए

एक ओर थोड़े गम है ....
एक ओर जानू खुशिया या गम है
एक ओर सालो का साथ है दिखता
दूसरी ओर एक नया सा मौसम है

किस ओर जाऊ ये तो जाना मैंने
पर एक राह को तो चुनना होगा
या चुनु जानी पचनी राह
या अनजानी राह पर चलना होगा

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