Friday, May 22, 2009

अकेलापन

क्यू रात कुछ ज्यादा लम्बी सी लगी
क्यू सुबह आज गुमसुम सी लगी
क्यू अकेले इतने है हम आज
की खुशिया भी हमे गम सी लगी

रात के तारो में क्यू चमक थी
आग की ज्वाला में क्यू दहक थी
क्यू खामोश सी सब हवाए थी
क्यू फूलो में भी कोई महक थी

जिंदगी इतनी वीरान सी क्यू लगी
दुनिया इतनी हैरान सी क्यू लगी
क्यू इतनी तनहा सी तन्हाई भी
दुनिया इतनी अनजान सी क्यू लगी

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