जाने क्यू दिल में ये ख्याल आया
क्यू टूटते है दिल ये सवाल आया
क्यू ऐसा कोई अहसाह दिल में उठता है
जो हर पल दिल में चुभता है
वो बात हर बात में दर्द देती है
जो याद मुस्कान छीन लेती है
जो साथ सबसे अकेला कर देता है
जो प्यार प्यार नही देता है
क्यू ये दिल इतना पत्थर न हो पाता है
क्यू दिल हल ऐ दिल न बताता है
क्यू जिदगी इतनी तनहा हो जाती है
क्यू खुशिया हमसे रुसवा हो जाती है
जिदगी में जाने क्यू ऐसे पल आते है
जब हम इतने तनहा हो जाते है
क्यू दिल प्यार किसी से इतना करता है
जब दुसरे के दिल वो अहसाह न आते है
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