जो दिल महसूस कर रहा है
उसे प्यार कहू का कुछ और
उसके न होने से जो होता है
उसे इकरार कहू या कुछ और
वो पास भी आता है फिर
चुपके से उसे भी चला जाता है
दर्द या का पर जाने क्यू
वो कभी समझ न पाता है
जो सांसो में हलचल है
उसे एतबार कहू या कुछ और
को कह कर न कह सके हम
उसे इजहार कहू या कुछ और
याद बन के कोई चुपके से
मन में कैसे आ जाता है
चाहो न चाहो ,
आँखों में पानी दे जाता है
जिसको इतना याद करता है दिल
उसे अपना कहू या कुछ और
जो सच न हो सकी तमन्ना
उसे सपना कहू या कुछ और
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