यू तो समझा है मुझे बस थोड़ा और समझ पाते
मेरे दिल को पढ़कर मेरी राह को चुन पाते
तुमने जो चुनी है वो राह सही है
पर जिसे मैं ढूंढ रही थी क्या ये वही है
मैं तुम्हारी राह पर चल जाऊगी
जो तुमने चाहा वो ही बन जाऊगी
पर क्या लक्ष्य है तुम्हारा ये क्या तुमने जाना
मुझे लक्ष्य देना या अपने लक्ष्य तक पहुचना
Wednesday, August 29, 2018
क्या लक्ष्य है
Tuesday, August 21, 2018
इंतज़ार करते है
वक़्त का तुम्हारे हर वक़्त इंतज़ार करते है
हमभी हो जरूरी इसका इंतज़ार करते है
हम तुम्हारी ख्वाहिश बार बार करते है
हम तो हर पल तुम्हारा दीदार करते है
हम तो तुम्हे सबसे अजीज करार करते है
तुम्हे अपनी जिंदगी से ज्यादा प्यार करते है
तुम सदा पास ही रहो इसका इंतजार करते है
Sunday, August 19, 2018
न रोकेगे तुमको
Saturday, August 18, 2018
खुद को
धीरे से खुद को अपनी बात बता देती हूं मैं
हर कदम मिलेगा न कोई हमसफर हमको
इसी लिए खुद को हमसफर बना लेती हूं मैं
आंखों गुमसुम सी रातो में जगती है
कुछ बातों का अहसासों तूफान धड़कन में
अपनी एक कहानी अनकही सी लगती है
किसी पन्ने पर कविता में रचा देती हूं मैं
जो कह न सकी जो कोई सुन न सका
वो उन शब्दों में खुद को सुना देती हूं मैं
Friday, August 17, 2018
अटल रहते है
जीवन मृत्यु अखंड सत्य है
एक दिन तो सबको जाना है
फिर भी आंखों में अश्रू
मुश्किल है अंतिम विदाई दे पाना
एक पथ बनाया था उन्होंने
गर कुछ दूर भी उस पर चल पाए
जिस देश का देखा था सपना
वैसा हम देश बदल पाए
वो लौट के अब ना आएंगे
पर अमर लोग कहाँ मरते है
उनके आदर्शों का दिशा दिखा कर
सबके दिलों में अटल रहते है
Thursday, August 16, 2018
तुम में
कुछ तो जादू है तुममे
जब तुम पास होते हो
बस मुस्कुराहट होठो में होती है
बस मुहब्बत दिल मे होती है
कोई सागर है तुम्हारी आँखों मे
जिसमे एक पल भी देखो तो
इन आँखों मे कभी डूब जाती हूँ
कभी सब पार कर जाती हूँ
कुछ तो हुनर है पास तेरे
जब तुम सुन रहे हो मेरी बातें
तो जाने कैसे सब कहती जाती हूँ
हर अनकही बातेँ तुम्हे बताती हुँ
कर्म
ये शरीर कभी मिट जाए गा
धु धु कर के जल जाएगा
पर कर्म यही रह जाता है
उसको न मिटा कोई पायेगा
न नाम से कोई याद रहे
ये कर्म ही तो नाम देता है
सादिया जिस को स्मरण कर
ऐसा कर्म ही बना देता है
कर्म ही पुण्य देता है
कर्म ही पाप कहलाता है
कर्म पल पल जुड़ कर
जीवन अध्याय बनता जाता है
आज अगर आंखों में आंसू है
तुम्हारे दुनिया ये जाने पर
यू जिये थे तुम अपना जीवन
कर्म रहा यही हमारे मिट जाने पर
Monday, August 6, 2018
इश्क़ क्या है
इश्क़ की आरजू क्यों है ये ना कहना चाहा
शायद ये ही इश्क़ है इबादत है
सब ख्वाहिशे जो पास तुम्हारे पूरी हो जाती है
जब दिल मिले तो बस ये ही मुहब्बत है
मिलन की घड़ियां गिनते रहते है
तुम्हारी मुस्कान काफ़ी मेरी मुस्कानों के लिए
अकेले में भी तुम्हारी हर बात याद करते है
जो मन सब अनकही भी तुमसे कहता है
न साथ जीने मरने की कसमें है
फिर हर सांस में नाम तुम्हारा होता है