इश्क़ की परिभाषा क्या है ये ना समझना चाहा
इश्क़ की आरजू क्यों है ये ना कहना चाहा
इश्क़ की आरजू क्यों है ये ना कहना चाहा
एक सुकून एक अपनापन है तुम्हारे साथ
शायद ये ही इश्क़ है इबादत है
सब ख्वाहिशे जो पास तुम्हारे पूरी हो जाती है
जब दिल मिले तो बस ये ही मुहब्बत है
शायद ये ही इश्क़ है इबादत है
सब ख्वाहिशे जो पास तुम्हारे पूरी हो जाती है
जब दिल मिले तो बस ये ही मुहब्बत है
बंद आखो में तुम्हारा दीदार हम करते है
मिलन की घड़ियां गिनते रहते है
तुम्हारी मुस्कान काफ़ी मेरी मुस्कानों के लिए
अकेले में भी तुम्हारी हर बात याद करते है
मिलन की घड़ियां गिनते रहते है
तुम्हारी मुस्कान काफ़ी मेरी मुस्कानों के लिए
अकेले में भी तुम्हारी हर बात याद करते है
जो पल पल दिल को महसूस होता है
जो मन सब अनकही भी तुमसे कहता है
न साथ जीने मरने की कसमें है
फिर हर सांस में नाम तुम्हारा होता है
जो मन सब अनकही भी तुमसे कहता है
न साथ जीने मरने की कसमें है
फिर हर सांस में नाम तुम्हारा होता है
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