जाने क्यों फिर एक आंसू छलक आया है
खुश सब लोग है पर जाने में खुश क्यू नही
जाने किस गम ने मुझे इतना सताया है
अपने भी कभी दूर कभी पास होते है
जरूरत हो तो दूसरे के पास भी वक़्त हो
ऐसे इतेफाक यहां भी कम ही होते हैं
कैसे फिर से मुस्कुराये कैसे खिलखिलाए हम
शायद दुसरो में दोस्त ढूंढना नही गलत था
क्यों न अपने ही दोस्त बन जाए हम